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‘कार्रवाई नहीं हुई तो सत्ता छोड़ने पर मजबूर होंगे’, SRA अभय योजना पर अमेय घोले का भाजपा को अल्टीमेटम

परीक्षित गुप्ता  

मुंबई। मुंबई महानगरपालिका की सत्ता में शामिल भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच SRA अभय योजना को लेकर टकराव खुलकर सामने आ गया है। शिवसेना के गुटनेता अमेय घोले ने आरोप लगाया है कि झुग्गीवासियों के काम कराने के नाम पर कथित तौर पर 5 से 10 लाख रुपये तक की मांग की जा रही है। उन्होंने प्रशासन पर शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई नहीं होने पर सत्ता से दूरी बनाने तक की चेतावनी दी है। 



घोले का कहना है कि उन्होंने करीब एक महीने पहले यह मुद्दा उठाया था, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। मामला उस समय और गरमा गया जब उन्होंने बीएमसी की स्थायी समिति की बैठक से वॉकआउट किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक कथित भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, शिवसेना स्थायी समिति की बैठकों में हिस्सा नहीं लेगी। समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने प्रशासन को आरोपों की जांच कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। 


यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अभय योजना के दायरे को बढ़ाकर करीब 25 हजार झुग्गीधारकों को राहत देने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। योजना का उद्देश्य लंबे समय से अटके पुनर्वास मामलों में पात्र लोगों को राहत देना है। 


घोले का बयान केवल प्रशासन पर सवाल नहीं है। यह भाजपा-शिवसेना गठबंधन के भीतर बढ़ते तनाव का भी संकेत है। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित वसूली का वास्तविक तंत्र कितना बड़ा है।

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