नई दिल्ली। सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने आपदा प्रबंधन और राहत-बचाव व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सरकार ने राजधानी में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के गठन का फैसला किया है। प्रस्तावित बल में करीब 1100 जवान तैनात किए जाएंगे।
सरकार की योजना केवल नया बल खड़ा करने तक सीमित नहीं है। SDRF के गठन के साथ दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारियों और सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य किसी हादसे या आपदा की स्थिति में अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल कायम करना और राहत-बचाव अभियान को तेजी से संचालित करना है।
राजधानी में घनी आबादी, बहुमंजिला इमारतों, संकरी गलियों और निर्माण गतिविधियों को देखते हुए आपदा के समय तत्काल प्रतिक्रिया बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी इमारत के ढहने, आग लगने या अन्य बड़े हादसे में शुरुआती कुछ घंटे ही राहत-बचाव के लिहाज से निर्णायक होते हैं।
सत्य निकेतन हादसे के बाद उठे सवालों के बीच SDRF का गठन सरकार के लिए बड़ी जिम्मेदारी भी है। अब चुनौती यह होगी कि 1100 जवानों की सिर्फ संख्या बढ़ाने के बजाय उन्हें आधुनिक उपकरण, नियमित प्रशिक्षण और स्पष्ट जिम्मेदारियों के साथ तैयार किया जाए।
सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से आपदा के समय फायर सर्विस, सिविल डिफेंस, पुलिस और अन्य एजेंसियां एकीकृत तरीके से काम कर सकेंगी। अब देखना होगा कि यह फैसला कागजी ढांचे तक सीमित रहता है या दिल्ली की जमीनी आपदा-प्रतिक्रिया व्यवस्था में वास्तव में बदलाव दिखाई देता है।

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