बेंगलुरु/नई दिल्ली। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे डी.के. शिवकुमार ने पश्चिमी घाट से जुड़े कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट और राज्य में सूखे की स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लिए समय मांगा है। शिवकुमार ने कहा कि वह इन दोनों मुद्दों पर राज्य का पक्ष सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री के सामने रखना चाहते हैं।
कर्नाटक विधानसभा ने हाल ही में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को उसके मौजूदा स्वरूप में खारिज करने का प्रस्ताव पारित किया है। राज्य सरकार का कहना है कि पश्चिमी घाट में प्रस्तावित पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के निर्धारण से किसानों और स्थानीय आबादी पर असर पड़ सकता है। राज्य ने केंद्र को अपनी आपत्तियां और सुझाव भेजने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई है।
दूसरी ओर, सूखे की स्थिति को लेकर शिवकुमार ने बताया कि 200 से अधिक तालुक सूखे से प्रभावित होने की स्थिति में हैं और किसानों को भारी नुकसान हुआ है। इससे पहले राज्य सरकार ने केंद्र से सूखा राहत के लिए करीब 3,750 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी। अब प्रभावित क्षेत्रों की संख्या बढ़ने के बाद अतिरिक्त सहायता की मांग की जा रही है। केंद्र की टीम 3 से 6 अक्टूबर के बीच राज्य में फसल नुकसान का आकलन करेगी।
हालांकि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को लेकर भाजपा और जेडीएस की भागीदारी पर मतभेद सामने आए हैं। दोनों दलों के नेताओं ने सूखा राहत के प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने से इनकार किया है।

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