लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले सियासी गणित तेजी से बदल रहा है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर एक सीट के लिए 37 वोट चाहिए। छह विधानसभा सीटें खाली होने के कारण प्रभावी संख्या 397 है।
विधानसभा में भाजपा के 256 विधायक हैं। उसके सहयोगियों अपना दल (एस) के 13, आरएलडी के 9, सुभासपा के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं। इस हिसाब से NDA के पास 289 विधायक हैं। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो विधायकों तथा तीन असंबद्ध विधायकों के रुख को जोड़कर अलग-अलग राजनीतिक गणित बन सकता है। मौजूदा संख्या में NDA सात सीटों के लिए जरूरी 259 वोट से काफी आगे है। आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ेगा।
दूसरी तरफ सपा के 101 और कांग्रेस के 2 विधायक, यानी विपक्षी खेमे के पास 103 विधायक हैं। 74 वोट से सपा दो सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि उसके पास तीसरी सीट के लिए 29 अतिरिक्त वोट बचेंगे। इसी वजह से सपा ने अब तीसरा उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। रिपोर्टों के अनुसार रामगोपाल यादव और आलोक रंजन के साथ सलीम इकबाल को मैदान में उतारने की तैयारी है। तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए सपा को अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।
यही तीसरी सीट अब चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण गणित बन गई है। NDA के सात उम्मीदवारों और सपा के दो उम्मीदवारों की स्थिति संख्या बल से मजबूत है, जबकि दसवीं सीट के लिए अतिरिक्त वोट, उम्मीदवारों की संख्या और संभावित क्रॉस-वोटिंग महत्वपूर्ण होगी। नामांकन की प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू हो रही है और 6 अक्टूबर तक चलेगी।

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