मुंबई। टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की सालाना आम बैठक (AGM) एक बार फिर चर्चा में है। 18 अगस्त को पर्याप्त कोरम नहीं होने के कारण AGM स्थगित हो गई थी—टाटा संस के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ। अब कंपनी अगले करीब एक महीने में AGM बुलाने की तैयारी कर रही है और अगर जरूरी कोरम पूरा नहीं हो पाया तो नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से बैठक आयोजित कराने के लिए निर्देश मांगने का विकल्प तलाश रही है।
विवाद की जड़ सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) की भूमिका से जुड़ी है। दोनों प्रमुख ट्रस्टों की संयुक्त हिस्सेदारी टाटा संस में करीब 51.5% बताई गई है। कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत AGM के कोरम में दोनों ट्रस्टों द्वारा संयुक्त रूप से नामित अधिकृत प्रतिनिधि की मौजूदगी महत्वपूर्ण है। SRTT पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की ओर से लगी पाबंदियों के कारण दोनों ट्रस्ट संयुक्त प्रतिनिधि नामित नहीं कर पाए थे।
इसी वजह से 18 अगस्त की बैठक आगे नहीं बढ़ सकी। बाद में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने टाटा संस को AGM आयोजित करने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक तीन महीने की अतिरिक्त मोहलत दी।
आगामी AGM में एन. चंद्रशेखरन के निदेशक के रूप में पुनर्नियुक्ति समेत लंबित कॉरपोरेट मामलों पर फैसला होना है। ऐसे में AGM सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं रह गई है; कोरम और ट्रस्टों के बीच जारी शासन-संबंधी विवाद के कारण इसकी प्रक्रिया पर भी निगाहें टिकी हैं।

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