संपादकीय / प्रणव बजाज
25 साल तक लगातार किसी सरकार के मुखिया बने रहना भारतीय राजनीति में सामान्य घटना नहीं है। नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सत्ता संभाली थी। अक्टूबर 2026 में उनके सरकार प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे होंगे। जून 2026 में वे लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिन पूरे कर जवाहरलाल नेहरू के लगातार 4,398 दिनों के रिकॉर्ड से आगे निकल चुके हैं। 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनना इस राजनीतिक यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।
लेकिन 25 साल की कहानी केवल चुनाव जीतने की कहानी नहीं है। मोदी की सबसे बड़ी राजनीतिक विशेषता यह रही कि उन्होंने शासन को योजनाओं, तकनीक और सीधे लाभ पहुंचाने वाले तंत्र से जोड़ने की कोशिश की। जनधन योजना के तहत अगस्त 2026 तक 59 करोड़ से अधिक खाते खुल चुके हैं। इनमें 56 प्रतिशत खाताधारक महिलाएं हैं और 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण तथा अर्धशहरी क्षेत्रों में हैं। DBT और डिजिटल भुगतान ने सरकार और लाभार्थी के बीच की दूरी कम करने का दावा मजबूत किया है।
UPI इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अगस्त 2026 में UPI पर 24,508.96 मिलियन यानी करीब 2,450 करोड़ लेन-देन हुए, जिनका मूल्य लगभग ₹29.82 लाख करोड़ रहा। यह सिर्फ भुगतान की सुविधा नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के आकार में आए बदलाव का संकेत है।
GST ने देश के बिखरे अप्रत्यक्ष कर ढांचे को एक साझा व्यवस्था में बदलने की कोशिश की। 2017 में लागू GST में 17 कर और 13 सेस समाहित किए गए। मई 2026 तक GST करदाताओं की संख्या 1.65 करोड़ बताई गई है, जबकि 2017 में यह 66.5 लाख थी। इसके साथ यह भी सच है कि GST को लेकर छोटे व्यापारियों की अनुपालन संबंधी शिकायतें और दरों की जटिलता लंबे समय तक राजनीतिक बहस का विषय रही हैं। इसलिए इसे उपलब्धि कहने के साथ उसकी लागत और व्यावहारिक समस्याओं पर नजर रखना भी जरूरी है।
सड़क और रेल क्षेत्र में बदलाव आंकड़ों में दिखाई देता है। राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2014 के 91,287 किलोमीटर से बढ़कर मार्च 2026 में लगभग 1,46,572 किलोमीटर हो गई। 2014 में चार लेन या उससे बड़े राष्ट्रीय राजमार्ग 18,371 किलोमीटर थे, जो बढ़कर 45,516 किलोमीटर बताए गए हैं। जुलाई 2026 तक ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका था।
स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं में भी बड़े कार्यक्रम सामने आए। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना अब सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू है और 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों तक कवरेज बढ़ाया गया है। जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाकर ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को केवल पाइप बिछाने से आगे स्थायी सेवा के रूप में विकसित करने की दिशा में बदला गया है।
मोदी सरकार की पहचान केवल कल्याणकारी योजनाओं से नहीं बनी। 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून बड़ा राजनीतिक निर्णय था। दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया की वैधता बरकरार रखी। इसी तरह नागरिकता संशोधन कानून 2019 पारित हुआ और उसके नियम 11 मार्च 2024 को अधिसूचित किए गए। इन दोनों फैसलों ने भारत की राजनीति को लंबे समय के लिए प्रभावित किया है और इनके पक्ष-विपक्ष में आज भी तीखी राजनीतिक बहस मौजूद है।
विदेश नीति में भी भारत की भूमिका का विस्तार हुआ। 2023 की G20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्य बनाए जाने में भारत की पहल महत्वपूर्ण रही। ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता देना मोदी सरकार की विदेश नीति की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है।
यही वह बिंदु है जहां मोदी की उपलब्धियों और मोदी के राजनीतिक व्यक्तित्व को अलग-अलग देखने की जरूरत है। जनविश्वास किसी व्यक्ति को असाधारण ऊंचाई तक पहुंचा सकता है, लेकिन लोकतंत्र में कोई व्यक्ति संस्था से बड़ा नहीं हो सकता। परिवारवाद लोकतंत्र के लिए समस्या है तो व्यक्तिवाद भी उतना ही बड़ा जोखिम है। यदि योजनाओं का लाभ व्यक्ति के नाम से नहीं बल्कि नागरिक के अधिकार और सरकार की जवाबदेही से जुड़ता है, तभी व्यवस्था टिकाऊ बनेगी।
मोदी के 25 वर्षों की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा अब यही है। केंद्र में कार्यसंस्कृति बदलने के दावों के बावजूद राज्यों, स्थानीय निकायों और प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, देरी और जवाबदेही की शिकायतें खत्म नहीं हुई हैं। किसी सरकार की असली सफलता केवल यह नहीं कि वह कितनी बार चुनाव जीतती है; सवाल यह है कि उसके जाने के बाद भी उसकी बनाई संस्थागत व्यवस्था कितनी ईमानदार, पारदर्शी और प्रभावी रहती है।
इसलिए उज्जैन में दीप जलें, करोड़ों लोग जन्मदिन मनाएं, योजनाओं के लाभार्थी आशीर्वाद दें—यह लोकतंत्र का उत्सव हो सकता है। लेकिन लोकतंत्र का सबसे बड़ा दीप बूथ पर जलता है, जहां जनता किसी नेता को नहीं बल्कि उसके काम, वादे और भविष्य को देखकर मतदान करती है।
मोदी ने भारतीय राजनीति की धारा बदली है—यह बात उनके समर्थक भी कहते हैं और उनके विरोधी भी इस बदलाव को नकार नहीं सकते। असली सवाल यह है कि यह धारा व्यक्ति के साथ चलती है या संस्थाओं में स्थायी परिवर्तन बन चुकी है। 25 साल पूरे होने पर मोदी की सबसे बड़ी राजनीतिक विरासत का फैसला इसी कसौटी पर होगा।
व्यक्ति चला जाता है, धारा और संस्थाएं बचती हैं। इसलिए मोदी युग का अगला सवाल ‘मोदी के बाद कौन?’ से बड़ा है—‘मोदी के बाद व्यवस्था कैसी रहेगी?’
*जन्मदिन पर प्रधानमंत्री मोदी को बधाई*
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी।
ईश्वर आपको स्वस्थ रखें और देशसेवा के लिए निरंतर शक्ति प्रदान करें।

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