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MP के कर्मचारियों को UPS की उम्मीद, सरकार ने बनाई समिति; 4 महीने में आएगी रिपोर्ट

भोपाल । बौद्धिक प्रतिकार



मध्यप्रदेश के उन सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन व्यवस्था को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जो 1 जनवरी 2005 या उसके बाद सरकारी सेवा में आए हैं। राज्य सरकार ने इन कर्मचारियों के लिए केंद्र की तर्ज पर एकीकृत पेंशन योजना (UPS) को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लागू करने की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए समिति गठित की है। हालांकि, फिलहाल UPS लागू करने का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।


प्रदेश में 1 जनवरी 2005 से NPS लागू है। यह अंशदायी पेंशन व्यवस्था है, जिसमें कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान करते हैं। मध्यप्रदेश सरकार के आधिकारिक पेंशन पोर्टल के अनुसार राज्य में 1 जनवरी 2005 और उसके बाद नियुक्त सरकारी सेवकों पर NPS लागू है।


नई समिति की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव ऊर्जा मनु श्रीवास्तव करेंगे। इसमें वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी, सचिव लोकेश कुमार जाटव, संचालक बजट हर्षिका सिंह और सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव अंकित अस्थाना सदस्य होंगे। संचालक पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा पीके श्रीवास्तव को सदस्य सचिव बनाया गया है। समिति को चार महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है।


समिति केवल पेंशन के प्रावधान नहीं देखेगी, बल्कि इसके वित्तीय और प्रशासनिक प्रभाव का भी अध्ययन करेगी। इसके बाद सरकार तय करेगी कि मध्यप्रदेश में NPS के तहत आने वाले कर्मचारियों को UPS का विकल्प दिया जाए या नहीं।


केंद्र की UPS में निर्धारित शर्तों के तहत 25 वर्ष की अर्हकारी सेवा पर अंतिम 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत सुनिश्चित पेंशन का प्रावधान है।

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