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एमपी में शराब टेंडर पर बड़ा सवाल, 7 कंपनियों की बोली में मिलीभगत का आरोप; हाईकोर्ट ने जांच रोकने से किया इनकार

इंदौर । बौद्धिक प्रतिकार



मध्यप्रदेश में देशी शराब के टेंडरों में कथित मिलीभगत का मामला अब फिर सुर्खियों में है। सात शराब कंपनियों की बोली प्रक्रिया में संभावित बिड-रिगिंग/कार्टेल के आरोपों की जांच कर रहे भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को हाईकोर्ट से रास्ता मिल गया है। कंपनियों ने CCI की जांच और उसके अधिकार क्षेत्र को चुनौती देते हुए राहत मांगी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने याचिकाएं खारिज कर दीं। इसका सीधा मतलब है कि जांच को आगे बढ़ाने पर फिलहाल कोई न्यायिक रोक नहीं है।


मामले की जड़ देशी शराब की टेंडर प्रक्रिया में बताई जा रही है। उपलब्ध CCI रिकॉर्ड में मध्यप्रदेश के शराब टेंडरों में बोली लगाने वालों के बीच संभावित पूल बनने और कुछ टेंडरों में बेहद करीबी दरें सामने आने का उल्लेख है। CCI ने संबंधित सामग्री के आधार पर प्रतिस्पर्धा कानून के तहत जांच की दिशा में कार्रवाई की है। 


अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कंपनियों ने स्वतंत्र रूप से बोली लगाई थी या पहले से तय रणनीति के तहत दरें निर्धारित की गईं? यदि जांच में मिलीभगत साबित होती है तो मामला केवल कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टेंडर प्रक्रिया की निगरानी और सरकारी राजस्व पर संभावित असर भी जांच के दायरे में आ सकता है।


हाईकोर्ट के फैसले के बाद CCI जांच पूरी कर आगे आदेश जारी कर सकेगा। हालांकि, अभी कंपनियों को दोषी ठहराया नहीं गया है; आरोपों की जांच जारी है।

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