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सत्य निकेतन हादसा: CJP की 7 मांगें, अब जांच से आगे जवाबदेही की बारी



नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत ढहने से हुई मौतों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के सामने सात मांगें रखकर छात्र आवास व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि हादसे को केवल एक इमारत के गिरने की घटना मानकर कार्रवाई खत्म नहीं होनी चाहिए, बल्कि पूरे पीजी तंत्र की जांच जरूरी है। 


CJP की प्रमुख मांगों में पीजी माफिया और राजनीतिक संरक्षण के कथित गठजोड़ की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और हादसे के पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देना शामिल है। पार्टी ने दिल्ली के सभी पीजी और छात्र आवासों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने की भी मांग की है। 


इसके अलावा सीजेपी ने छात्रों के लिए पर्याप्त सरकारी छात्रावास बनाने, सुरक्षित और किफायती आवास की व्यवस्था करने तथा अवैध या असुरक्षित पीजी पर कठोर कार्रवाई की मांग उठाई है। संगठन का तर्क है कि जब विश्वविद्यालयों में छात्रावासों की क्षमता सीमित रहती है, तो बड़ी संख्या में विद्यार्थी निजी पीजी पर निर्भर हो जाते हैं और इसी का फायदा अनियमित संचालक उठा सकते हैं। 


मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई शुरू हुई है और दिल्ली उच्च न्यायालय ने जांच तथा पीजी इमारतों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। 


अब असली सवाल यही है—**क्या कार्रवाई सिर्फ हादसे के बाद होगी, या उन अधिकारियों और व्यवस्थाओं की भी जवाबदेही तय होगी जिन्होंने असुरक्षित छात्र आवासों को चलने दिया?**

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