यमन के हूती आंदोलन ने लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों में हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार पर बड़ा असर डाला है। हूती समूह को ईरान समर्थित क्षेत्रीय नेटवर्क का हिस्सा माना जाता है। अमेरिकी और अन्य पश्चिमी सरकारों की रिपोर्टों में ईरान पर हूतियों को हथियार, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता देने के आरोप लगाए गए हैं। ईरान इन आरोपों में से कई को खारिज करता रहा है।
हूतियों के पास हथियारों का बड़ा और विविध भंडार है। इसमें बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और ड्रोन शामिल हैं। समुद्री हमलों के लिए समूह ने ड्रोन और एंटी-शिप मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया है। इसके अलावा उनके पास रॉकेट, छोटे हथियार और अन्य सैन्य उपकरण मौजूद हैं।
हथियारों की आपूर्ति के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर कुछ प्रणालियों के निर्माण और पुराने हथियारों में बदलाव की क्षमता ने हूतियों की सैन्य क्षमता को बढ़ाया है। ईरान से कथित तकनीकी सहायता और स्थानीय उत्पादन—दोनों को विशेषज्ञ समूह की क्षमताओं का हिस्सा मानते हैं।
लाल सागर दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों के मार्ग बदलकर अफ्रीका के दक्षिणी छोर से जाने का विकल्प अपनाया, जिससे यात्रा का समय और लागत बढ़ सकती है।

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