नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को केंद्रीय राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ बैठक कर उनके मंत्रालयों के कामकाज और योजनाओं की प्रगति की सीधी समीक्षा की। खास बात यह रही कि बैठक में नौकरशाहों की मौजूदगी के बजाय मंत्रियों से सीधे उनके काम का ब्योरा लिया गया।
बैठक में योजनाओं के क्रियान्वयन, काम की गति, परिणाम और मंत्रालयों की जिम्मेदारियों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने समय पर काम पूरा करने, गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया। आने वाले हफ्तों में राज्य मंत्रियों के साथ ऐसी और बैठकें होने की संभावना बताई जा रही है।
इन बैठकों का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि केंद्र में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर लंबे समय से अटकलें चल रही हैं। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक फेरबदल की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन लगातार हो रही प्रदर्शन समीक्षा को संभावित बदलाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि प्रधानमंत्री की समीक्षा में केवल योजनाओं की प्रगति ही नहीं, बल्कि मंत्रियों की कार्यशैली, परिणाम देने की क्षमता और राजनीतिक प्रभावशीलता भी महत्वपूर्ण कसौटी हो सकती है।
यदि फेरबदल होता है तो कमजोर प्रदर्शन वाले चेहरों पर गाज गिर सकती है और बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्य मंत्रियों को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या मोदी की यह समीक्षा केवल शासन की रफ्तार बढ़ाने की कवायद है या जल्द होने वाले बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत?

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