एलओसी से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक चौकसी तेज, सांबा से पुंछ-राजौरी तक आतंकियों की हर चाल पर नजर
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ की कोशिशों पर सुरक्षाबलों ने इस साल अब तक सात बार पानी फेर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अलग-अलग स्थानों से घुसपैठ की कोशिशें की गईं, जिन्हें सेना, सीमा सुरक्षा बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस के समन्वित सुरक्षा तंत्र ने नाकाम किया। इन अभियानों में कई आतंकियों और घुसपैठियों के मारे जाने की भी सूचना है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, घुसपैठ की कोशिशें सांबा, सुंदरबनी, भीमबर गली, नौशेरा, उड़ी, पुंछ और राजौरी जैसे संवेदनशील इलाकों में सामने आईं। इसके बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और गश्त और कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील इलाकों में चौबीसों घंटे निगरानी, क्षेत्र प्रभुत्व अभियान और संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल जांच पर जोर दिया जा रहा है।
हाल के दिनों में पुंछ और राजौरी क्षेत्र में संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन गतिविधियों तथा जंगलों में हथियारबंद लोगों की सूचना के बाद भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि सीमा पार से खतरा केवल पारंपरिक घुसपैठ तक सीमित नहीं है।
सुरक्षाबलों के लिए चुनौती अब सिर्फ सीमा पर घुसपैठ रोकना नहीं, बल्कि घुसपैठ के बाद आतंकियों के संभावित नेटवर्क को जड़ से खत्म करना भी है। सात कोशिशों का नाकाम होना सुरक्षा तंत्र की सतर्कता दिखाता है, लेकिन कोशिशों का लगातार जारी रहना यह भी बताता है कि सीमा पार बैठे आतंकी ढांचे अभी शांत नहीं हुए हैं।
**सीमा पर एक चूक का मतलब भीतर कई जिंदगियों पर खतरा हो सकता है—इसलिए फिलहाल जम्मू-कश्मीर में चौकसी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।**

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