गर्भावस्था की शुरुआत में होने वाला अल्ट्रासाउंड कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण होता है। लेकिन हर महिला का पहला स्कैन एक ही समय पर हो, यह जरूरी नहीं। डॉक्टर आपकी आखिरी माहवारी की तारीख, लक्षण और गर्भावस्था की स्थिति के आधार पर समय तय करते हैं।
पहला अल्ट्रासाउंड कब होता है?
कई मामलों में शुरुआती अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था के पहले कुछ सप्ताह में ही कराया जा सकता है, खासकर अगर तारीख स्पष्ट न हो, पेट दर्द या रक्तस्राव जैसी समस्या हो या डॉक्टर को गर्भ की स्थिति की पुष्टि करनी हो। वहीं नियमित डेटिंग स्कैन आमतौर पर 11 से 14 सप्ताह के बीच किया जाता है।
डॉक्टर अल्ट्रासाउंड में क्या देखते हैं?
सबसे पहले यह देखा जाता है कि गर्भावस्था सही जगह पर विकसित हो रही है या नहीं। इसके बाद भ्रूण की लंबाई और विकास के आधार पर गर्भ की उम्र का अनुमान लगाया जाता है। शुरुआती गर्भावस्था में भ्रूण की माप से ड्यू डेट तय करने में भी मदद मिलती है।
डॉक्टर यह भी देख सकते हैं कि भ्रूण की हार्टबीट और विकास सामान्य दिशा में है या नहीं तथा गर्भ में एक बच्चा है या जुड़वां/एक से अधिक भ्रूण।
11–14 सप्ताह का स्कैन क्यों खास है?
इस अवधि में होने वाले स्कैन में जरूरत और उपलब्ध स्क्रीनिंग के अनुसार नकल ट्रांसलूसेंसी (NT) जैसी जांच शामिल हो सकती है। इससे कुछ क्रोमोसोमल स्थितियों, जैसे डाउन सिंड्रोम, एडवर्ड्स सिंड्रोम और पटाऊ सिंड्रोम के जोखिम का आकलन करने में मदद मिलती है। यह स्क्रीनिंग है, किसी बीमारी की निश्चित पुष्टि नहीं।
अल्ट्रासाउंड सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है और इसमें एक्स-रे जैसी आयनकारी विकिरण का इस्तेमाल नहीं होता। फिर भी इसे डॉक्टर की सलाह और जरूरत के अनुसार ही कराया जाना चाहिए।
इसलिए पहला अल्ट्रासाउंड केवल ‘बच्चे की पहली तस्वीर’ नहीं, बल्कि गर्भावस्था की सही शुरुआत और आगे की जांचों की योजना बनाने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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