भोपाल। मध्य प्रदेश में इन दिनों तीन महिलाओं के नाम अलग-अलग मामलों को लेकर चर्चा में हैं। नेहा पच्चीसिया, तृप्ति सिंह राजपूत और श्वेता जैन—तीनों की कहानी अलग है, लेकिन तीनों मामलों में एक समान बात है: पहचान, प्रभाव और कथित अपराध के बीच का खतरनाक खेल।
नेहा पच्चीसिया कभी एयर होस्टेस थीं। वर्ष 2016 में एमपीपीएससी पास कर पुलिस सेवा में आईं और डीएसपी बनीं। सोशल मीडिया पर उनकी पहचान एक चर्चित और फिट पुलिस अधिकारी के रूप में भी रही। लेकिन अब वह कथित अवैध वसूली के मामले में जांच के घेरे में हैं और पुलिस के अनुसार फरार चल रही हैं। उनकी गिरफ्तारी पर इनाम घोषित किए जाने की भी खबर है।
दूसरी कहानी तृप्ति सिंह राजपूत की है। आरोप है कि उन्होंने खुद को आईएएस अधिकारी बताकर मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रवेश किया और अपनी सहेलियों के साथ वहां वीडियो बनाए। मामले में उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इस घटना ने विधानसभा की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
तीसरा नाम श्वेता जैन का है, जो 2019 के बहुचर्चित मध्य प्रदेश हनीट्रैप मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल रही हैं। उन पर प्रभावशाली लोगों को कथित तौर पर जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करने वाले गिरोह का हिस्सा होने के आरोप लगे थे।
तीनों मामलों का चरित्र अलग है, इसलिए आरोपों को अंतिम सत्य मानने के बजाय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष का इंतजार जरूरी है। लेकिन इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश में सत्ता, पहचान और प्रभाव के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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