इंदौर। स्वच्छता के लिए देशभर में पहचान बना चुके इंदौर में अब मृत पशुओं के निपटान की व्यवस्था भी आधुनिक होने जा रही है। नगर निगम ट्रेंचिंग ग्राउंड में करीब 3 करोड़ 5 लाख रुपये की लागत से पशु शवदाह गृह तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य मृत पशुओं को खुले में फेंकने या जमीन में दफनाने की पुरानी व्यवस्था से निजात दिलाना है
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अब तक शहर में मृत पशुओं को जमीन में दफनाने की व्यवस्था अपनाई जाती रही है। इससे दुर्गंध, संक्रमण और आसपास के पर्यावरण पर असर जैसी समस्याएं पैदा होने की आशंका रहती है। नई व्यवस्था में मृत पशुओं का वैज्ञानिक तरीके से अंतिम संस्कार किया जाएगा।
यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इंदौर जैसे तेजी से बढ़ते शहर में आवारा और पालतू पशुओं की मौत के बाद उनके सुरक्षित निपटान की चुनौती लगातार बनी हुई है। जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी मृत पशुओं के लिए अलग व्यवस्था और हेल्पलाइन दर्ज है।
करीब तीन करोड़ रुपये की लागत वाली यह सुविधा सिर्फ शवों के निपटान तक सीमित नहीं होगी, बल्कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ी होगी। अगर संचालन वैज्ञानिक मानकों के अनुसार हुआ तो इससे मृत पशुओं को लेकर सड़कों, खाली जमीनों और बस्तियों के आसपास पैदा होने वाली समस्या कम हो सकती है।
इंदौर ने इंसानों के शवों के लिए कई मुक्तिधाम देखे हैं, अब पशुओं के लिए भी सम्मानजनक और वैज्ञानिक अंतिम संस्कार की व्यवस्था तैयार हो रही है।

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