नई दिल्ली। एयरपोर्ट कारोबार में बड़ी मौजूदगी के बाद अडानी समूह के एयरलाइन क्षेत्र में प्रवेश को लेकर सरकार के स्तर पर मंथन जारी है। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने 22 सितंबर 2026 को कहा कि एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन चलाने की अनुमति देने के मामले में सरकार सभी फायदे और संभावित नुकसान पर विचार करेगी। फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
पेंच एयरपोर्ट-एयरलाइन क्रॉस-ओनरशिप का है। दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के संचालन से जुड़े 2006 के OMDA समझौतों में ऑपरेटरों के लिए किसी एयरलाइन में 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखने पर रोक है। रिपोर्टों के मुताबिक अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने इस संविदात्मक पाबंदी में छूट की मांग की है।
सरकार की चिंता हितों के टकराव से जुड़ी है। सवाल यह है कि अगर कोई कंपनी एयरपोर्ट भी संचालित करे और उसी का अपना एयरलाइन कारोबार भी हो, तो एयरपोर्ट पर स्लॉट, टर्मिनल सुविधाओं, पार्किंग, ग्राउंड हैंडलिंग और दूसरी सेवाओं तक पहुंच में सभी एयरलाइनों के साथ समान व्यवहार कैसे सुनिश्चित होगा। सरकार इसी तरह के संभावित प्रभावों का अध्ययन कर रही है।
अडानी समूह की एयरपोर्ट क्षेत्र में मौजूदगी बड़ी है। उसकी आधिकारिक जानकारी के अनुसार समूह मुंबई, नवी मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, मंगलुरु, जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम समेत आठ एयरपोर्ट का प्रबंधन/विकास कर रहा है।
मंत्री ने यह भी कहा है कि भारत को अधिक एयरलाइनों की जरूरत है, लेकिन एयरपोर्ट और एयरलाइन के एक ही कारोबारी समूह में होने से पैदा होने वाले संभावित प्रभावों को ध्यान में रखकर ही व्यवस्था तय की जाएगी।

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