जयपुर। राजस्थान में पहली बार पूरे राज्य के नगरीय निकाय चुनावों को एक साथ कराने की कवायद अब जमीन पर दिखाई दे रही है। ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत पहले चरण में आज 39 जिलों के 162 नगरीय निकायों के 5,393 वार्डों में मतदान हो रहा है। करीब 57.52 लाख मतदाता 20,623 प्रत्याशियों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे।
यह चुनाव महज पार्षद चुनने की प्रक्रिया नहीं है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के लिए यह सत्ता संभालने के बाद शहरी मतदाताओं के बीच पहली बड़ी परीक्षा है। भाजपा के सामने अपने परंपरागत शहरी आधार को बचाए रखने की चुनौती है। पार्टी ने कई जगह पुराने पार्षदों के टिकट काटकर नए चेहरों को मैदान में उतारा है। ऐसे में बागी उम्मीदवार और भीतरघात भाजपा की राह में मुश्किल पैदा कर सकते हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस के लिए यह विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद शहरी क्षेत्रों में वापसी का महत्वपूर्ण अवसर है। पार्टी ने सफाई, सड़क, बिजली, स्थानीय प्रशासन और नागरिक सुविधाओं को प्रमुख मुद्दा बनाया है। कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के लिए भी इन चुनावों का प्रदर्शन संगठन की जमीन मजबूत होने का संकेत होगा।
दिलचस्प यह है कि चुनाव शुरू होने से पहले ही 77 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं, जिनमें भाजपा के 44 और कांग्रेस के 16 प्रत्याशी शामिल हैं।
14 सितंबर को आने वाला परिणाम सिर्फ नगर निकायों का फैसला नहीं होगा—यह राजस्थान की अगली राजनीतिक दिशा के संकेत भी देगा।

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