नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सात साल बाद भारत दौरे से ठीक पहले दिल्ली में तिब्बती समुदाय ने विरोध प्रदर्शन कर चीन की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिनपिंग भारत आ रहे हैं और उनका प्रदर्शन दुनिया तक यह संदेश पहुंचाने के लिए है कि तिब्बती समुदाय चीन के कथित दमनकारी शासन का विरोध करता है।
प्रदर्शनकारियों ने तिब्बत में मानवाधिकारों और धार्मिक-सांस्कृतिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए चीन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि भारत की राजधानी में जिनपिंग की मौजूदगी के दौरान तिब्बत की स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आ रहे हैं। यह 2020 के गलवान संघर्ष के बाद उनका पहला भारत दौरा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है।
ऐसे समय में तिब्बती समुदाय का विरोध प्रदर्शन भारत-चीन संबंधों के संवेदनशील राजनीतिक और मानवीय पहलू को फिर सामने ले आया है। एक तरफ दोनों देश सीमा विवाद के बाद संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ तिब्बत का मुद्दा चीन के लिए लंबे समय से संवेदनशील बना हुआ है।
प्रदर्शनकारियों का संदेश साफ था—जिनपिंग की भारत यात्रा सिर्फ कूटनीतिक मुलाकात नहीं, बल्कि तिब्बत की आवाज दुनिया तक पहुंचाने का अवसर भी है।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोप उनके दावे हैं; उन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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