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चार दशक पुरानी जमीन की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सिर्फ पैसा लौटाकर सौदा पलटना ‘न्यायसंगत’ नहीं

 

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण संपत्ति विवाद में कहा है कि जब किसी जमीन की बिक्री विशिष्ट निष्पादन (Specific Performance) की डिक्री के बाद हो चुकी हो और खरीदार को कब्जा भी मिल चुका हो, तो कई दशक बाद केवल बढ़ी हुई रकम लौटाकर उस पूरे लेन-देन को पलटना न्यायसंगत नहीं होगा। 



मामला आगरा के पास करीब पांच बीघा कृषि भूमि से जुड़ा है। 16 जून 1975 को जमीन बेचने का पंजीकृत करार हुआ था। कीमत ₹20 हजार तय हुई और खरीदार ने ₹5 हजार अग्रिम दिए। ट्रायल कोर्ट ने 28 फरवरी 1979 को खरीदार के पक्ष में Specific Performance की डिक्री दी। इसके बाद 7 जून 1979 को अदालत के जरिए बिक्री विलेख निष्पादित हुआ और खरीदार तब से जमीन पर कब्जे में बताया गया। 


बाद में मामला अपीलों में गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमीन की बिक्री बहाल करने के बजाय लंबे समय बीतने को देखते हुए ₹15 लाख लौटाने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस दृष्टिकोण को अस्वीकार कर दिया।


जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि खरीदार ने दशकों पहले रकम चुकाकर स्वामित्व और कब्जा प्राप्त किया था। ऐसे में केवल समय बीत जाने के आधार पर पूरी हो चुकी बिक्री को धन-वापसी में बदलना उचित नहीं है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट की मूल डिक्री बहाल कर दी और खरीदार के कब्जे में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया। 


मामला Sobaran Singh (Dead) Through LRs v. Gordhan Singh (Dead) Through LRs, 2026 LiveLaw (SC) 962 है।

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