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पति का ‘मानसिक क्रूरता’ वाला दर्द माना HC ने, पत्नी की अपील खारिज; बेटी की पढ़ाई के लिए ₹70 लाख, पत्नी को ₹40 लाख

 

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में पति को मानसिक क्रूरता के आधार पर दिए गए तलाक को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने साथ ही नाबालिग बेटी की शिक्षा और भविष्य के लिए ₹70 लाख तथा पत्नी को ₹40 लाख स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया।



मामले में पति की ओर से आरोप लगाया गया था कि पत्नी के व्यवहार और वैवाहिक जीवन से जुड़े विवादों के कारण उसे लंबे समय तक मानसिक पीड़ा और तनाव झेलना पड़ा। निचली अदालत ने परिस्थितियों और रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद मानसिक क्रूरता को आधार मानते हुए तलाक की डिक्री पारित की थी। पत्नी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।


हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। अदालत ने तलाक को बरकरार रखते हुए आर्थिक सुरक्षा के पहलू पर भी स्पष्ट व्यवस्था की।


कोर्ट ने नाबालिग बेटी की शिक्षा के लिए ₹70 लाख की राशि अलग से सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, जबकि पत्नी के लिए ₹40 लाख स्थायी गुजारा भत्ता तय किया गया। इस तरह अदालत ने वैवाहिक संबंध समाप्त करने के साथ-साथ पत्नी और बेटी के आर्थिक हितों को भी ध्यान में रखा।


फैसले में यह भी स्पष्ट हुआ कि मानसिक क्रूरता केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं होती; वैवाहिक परिस्थितियों और व्यवहार का समग्र प्रभाव भी न्यायालय के विचार का हिस्सा बन सकता है।

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