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मंत्रालय में अब फैसले टालने का दौर खत्म?

 


भोपाल। मंत्रालय में प्रशासनिक कामकाज का तरीका बदलता नजर आ रहा है। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के स्तर पर लंबित फाइलों के तेजी से निपटारे की चर्चा प्रशासनिक गलियारों में है। बताया जा रहा है कि फाइल में कमी मिलने पर उसे केवल ‘चर्चा’ लिखकर आगे बढ़ाने के बजाय संबंधित अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव से तत्काल बात कर स्थिति स्पष्ट की जा रही है। इससे निर्णय के अभाव में फाइलों के अटकने की गुंजाइश कम हुई है।



इसका असर निचले स्तर तक दिखाई देने लगा है। मंत्रालय में यह संदेश जा रहा है कि उच्च स्तर पर निर्णय तेजी से हो रहे हैं तो अधिकारियों के स्तर पर भी फाइलों को अनावश्यक रूप से रोकना आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में यह कार्यशैली प्रशासन की गति पर कितना असर डालती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।


नरोत्तम से मुलाकातों ने बढ़ाई सियासी हलचल


दूसरी ओर भाजपा के भीतर पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को लेकर फिर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। दतिया उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी की हार के बाद उनके राजनीतिक प्रभाव को लेकर सवाल उठे थे। लेकिन हाल के घटनाक्रम ने इन चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है।


ओरछा में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विजय शाह और क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल की नरोत्तम मिश्रा से मुलाकातों ने सियासी अटकलों को हवा दी है। सवाल यही है कि क्या इन मुलाकातों के पीछे कोई राजनीतिक संदेश है या यह सामान्य संगठनात्मक संपर्क है?


वायरल चैट से वन विभाग में सवाल


वन विभाग में अफीम उत्पादन वाले इलाके में पदस्थ एक अधिकारी की कथित व्हाट्सएप बातचीत का स्क्रीनशॉट वायरल होने से नया विवाद खड़ा हो गया है। चैट में कथित तौर पर की गई मांगों को लेकर विभागीय हलकों में चर्चा है। हालांकि इसकी वास्तविकता की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।


बताया जा रहा है कि मामला वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुका है। अब असली परीक्षा विभाग की है—क्या वायरल चैट की सत्यता की जांच होगी और यदि वह सही पाई गई तो जिम्मेदारी तय होगी, या मामला कुछ दिनों की चर्चा के बाद ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

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