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राजस्व विभाग में ‘साहब राज’ या जवाबदेही?*



मनोरंजन कर में बकाया, यूनिपोल पर सवाल और वसूली के लिए बार-बार अभियान… इंदौर नगर निगम के राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली कठघरे में


प्रणव बजाज


इंदौर। शहर में नगर निगम की कमाई बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन राजस्व विभाग की जमीन पर स्थिति कई सवाल खड़े करती है। मनोरंजन कर, विज्ञापन और यूनिपोल से आय तथा संपत्तिकर वसूली—इन सभी मोर्चों पर निगम को बार-बार विशेष अभियान चलाने और अधिकारियों को लक्ष्य पूरा करने के निर्देश देने पड़ रहे हैं। सवाल यह है कि यदि व्यवस्था नियमित रूप से चल रही है तो हर बार ‘वसूली अभियान’ की जरूरत क्यों पड़ रही है?



मौजूदा निगमायुक्त क्षितिज सिंघल हैं और राजस्व विभाग का राजनीतिक प्रभार निरंजन सिंह चौहान के पास है। निगम की आधिकारिक वेबसाइट भी आयुक्त के तौर पर सिंघल का नाम दर्ज करती है।


मनोरंजन कर—जब आयोजनों से पैसा लेना भी चुनौती बन जाए


मार्च 2025 में यो यो हनी सिंह के कार्यक्रम को लेकर निगम ने प्रशासन से कहा था कि मनोरंजन कर जमा होने के बाद ही कार्यक्रम को अनुमति दी जाए। उस समय राजस्व प्रभारी निरंजन सिंह चौहान ने आरोप लगाया था कि व्यावसायिक आयोजनों से मनोरंजन कर नहीं मिलने के कारण निगम को राजस्व नुकसान हो रहा है। उन्होंने दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रम के बकाया मनोरंजन कर का भी मुद्दा उठाया था।


वहीं 2025-26 के निगम बजट में मनोरंजन कर से केवल 5 से 10 करोड़ रुपये की आय का अनुमान रखा गया था। यानी शहर में होने वाले बड़े-बड़े व्यावसायिक आयोजनों के मुकाबले इस मद की आय कितनी है, यह अपने आप में जांच का विषय है।


यूनिपोल—कागज पर नियंत्रण, जमीन पर सवाल


शहर में यूनिपोल और विज्ञापन संरचनाओं को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। अगस्त 2026 में नगर निगम के राजस्व विभाग की बाजार शाखा की यूनिपोल संबंधी कार्रवाई की जानकारी सामने आई।


लेकिन असली सवाल कार्रवाई की संख्या नहीं है—निगम की कुल विज्ञापन संपत्तियों का डिजिटल और भौतिक मिलान कब हुआ? कितने यूनिपोल वैध हैं? कितनों से नियमित शुल्क आ रहा है? कितने बकायेदार हैं और कितने हटाए गए?


जब तक निगम इन सवालों के जवाब सार्वजनिक नहीं करता, यूनिपोल व्यवस्था में पारदर्शिता पर सवाल बने रहेंगे।


वसूली के लिए सख्ती… फिर भी अभियान क्यों?


जनवरी 2026 में नगर निगम को राजस्व वसूली के लक्ष्य पूरे नहीं होने पर अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन में कटौती और सेवा समाप्ति तक की चेतावनी देनी पड़ी थी।


दूसरी तरफ निगम ने 2025 में करीब 1000 करोड़ रुपये की कर वसूली को बड़ी उपलब्धि बताया था। लेकिन इसी दौरान अप्रैल 2025 में जिला अदालत की टीम करीब 2.24 करोड़ रुपये की अदायगी के मामले में नगर निगम मुख्यालय की कुर्की के लिए पहुंची थी।


यहीं से सवाल उठता है—क्या निगम की राजस्व मशीनरी केवल वसूली का आंकड़ा दिखाने तक सीमित है, या वसूली की गुणवत्ता और कानूनी मजबूती भी जांची जाती है?


संपत्तिकर में नई योजनाएं, पुराने सवाल कायम


अगस्त 2026 में निगम ने नोटरी पर दर्ज करीब 50 हजार संपत्तियों से 50 करोड़ रुपये राजस्व जुटाने का लक्ष्य बताया। इस मामले में राजस्व प्रभारी निरंजन सिंह चौहान का नाम सामने आया।


यह लक्ष्य बताता है कि निगम के पास अभी भी बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां हैं, जिनसे राजस्व व्यवस्था को पूरी तरह जोड़ना बाकी है।


अब जवाब चाहिए


आयुक्त क्षितिज सिंघल और राजस्व प्रभारी निरंजन सिंह चौहान से शहर के सामने पांच सवाल हैं—


1. मनोरंजन कर की कुल मांग, वसूली और बकाया की वर्तमान राशि कितनी है?


2. शहर में कुल कितने यूनिपोल दर्ज हैं और इनमें से कितनों से नियमित शुल्क वसूला जा रहा है?


3. अवैध या बिना शुल्क वाले विज्ञापन ढांचे से निगम को पिछले तीन वर्षों में कितना संभावित राजस्व नुकसान हुआ?


4. संपत्तिकर में कुल बकाया कितना है और वसूली का वास्तविक प्रतिशत क्या है?


5. हर बार विशेष वसूली अभियान चलाने की नौबत क्यों आती है—क्या नियमित राजस्व व्यवस्था जवाबदेह नहीं है?


इंदौर नगर निगम देश के स्वच्छता मॉडल के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। अब राजस्व व्यवस्था में भी वही पारदर्शिता और जवाबदेही दिखाई देनी चाहिए। शहर को केवल वसूली के बड़े आंकड़े नहीं, बल्कि यह भी जानने का अधिकार है कि किससे कितना पैसा लेना था, कितना लिया गया और कितना अब भी बाकी है।

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