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डूमस्क्रॉलिंग की लत! रातभर रील्स और बुरी खबरें देखना बढ़ा सकता है एंग्जायटी



रात को बिस्तर पर लेटने के बाद “बस पांच मिनट फोन देख लेते हैं” से शुरू होने वाली आदत कब घंटों की स्क्रॉलिंग में बदल जाती है, पता ही नहीं चलता। लगातार नकारात्मक खबरें, दुर्घटनाएं, हिंसा, विवाद और परेशान करने वाले वीडियो देखते रहने की इस आदत को डूमस्क्रॉलिंग कहा जाता है।



विशेषज्ञों के अनुसार डूमस्क्रॉलिंग कोई अलग मानसिक बीमारी नहीं है, लेकिन यह तनाव, चिंता, नींद की खराबी और मानसिक थकान को बढ़ा सकती है। लगातार परेशान करने वाली सामग्री देखने से व्यक्ति के मन में खतरे और अनिश्चितता का एहसास बना रह सकता है। फिर चिंता कम करने के लिए वह और जानकारी खोजता है और यही एक दुष्चक्र बन जाता है। 


रात में यह आदत और ज्यादा नुकसानदेह हो सकती है। सोने से पहले लगातार मोबाइल देखने से दिमाग को आराम मिलने के बजाय नई जानकारियां और भावनात्मक उत्तेजना मिलती रहती है। शोधों में समस्याग्रस्त सोशल मीडिया उपयोग, खराब नींद और एंग्जायटी के बीच संबंध भी सामने आया है। 


बचाव के लिए क्या करें? विशेषज्ञ सोने से कुछ समय पहले फोन दूर रखने, स्क्रीन समय की सीमा तय करने, परेशान करने वाले खातों या सामग्री को सीमित करने और उसकी जगह किताब पढ़ने या अन्य शांत गतिविधियां अपनाने की सलाह देते हैं।


अगर फोन बंद करने के बाद भी बेचैनी, घबराहट, नींद की गंभीर समस्या या रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हों, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। याद रखें—हर स्क्रॉल जरूरी नहीं, लेकिन आपकी नींद और मानसिक शांति जरूर जरूरी है।

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