
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने ऊर्जा कंपनियों के शेयरों को भी मजबूत किया। ब्रेंट क्रूड हाल में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में हमलों और सप्लाई बाधित होने की आशंका ने बाजार को हिला दिया है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शेयर पोर्टफोलियो को लेकर नई रिपोर्ट ने राजनीतिक और नैतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के पोर्टफोलियो में कई एनर्जी कंपनियों में करोड़ों डॉलर का निवेश रहा है और तेल की कीमतों में उछाल के दौरान इन शेयरों के मजबूत प्रदर्शन से उन्हें बड़ा लाभ हुआ। रिपोर्ट में कुछ खरीद-बिक्री के समय को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
मामला इसलिए संवेदनशील है क्योंकि एक तरफ युद्ध और तेल संकट से अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पेट्रोल-डीजल महंगा होने का दबाव बढ़ रहा है, वहीं ऊर्जा कंपनियों और उनके निवेशकों को बढ़ती कीमतों से फायदा हो रहा है। अमेरिकी शेयर बाजार में भी हाल की गिरावट के बीच ऊर्जा क्षेत्र ने बेहतर प्रदर्शन किया और Exxon Mobil तथा Chevron जैसे शेयरों को तेल की तेजी से समर्थन मिला।
हालांकि ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से इन सौदों का निर्देश देकर युद्ध से लाभ कमाया, ऐसा निष्कर्ष उपलब्ध रिपोर्टों से सीधे नहीं निकाला जा सकता। उनके निवेशों के प्रबंधन को लेकर ब्लाइंड ट्रस्ट का हवाला दिया गया है। इसलिए असली सवाल केवल मुनाफे का नहीं, बल्कि राष्ट्रपति के नीतिगत फैसलों और उनके निजी निवेशों के बीच संभावित हितों के टकराव का है।
युद्ध ने तेल बाजार को जिस तरह झटका दिया है, उससे यह बहस और तेज होने की संभावना है कि सत्ता में बैठे व्यक्ति के निजी निवेशों की पारदर्शिता कितनी होनी चाहिए।
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