जबलपुर। सागर के बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद शराब की बिक्री को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई अब जबलपुर तक पहुंच गई है। मामले में जबलपुर के सहायक आबकारी आयुक्त को विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा है।
विभाग के अनुसार सहायक आबकारी आयुक्त ने 6 सितंबर को आदेश जारी कर जिले में सागर गोल्ड ब्रांड की शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। इस आदेश के लिए बंडा में हुई शराब त्रासदी को आधार बनाया गया।
विभाग ने नोटिस में सवाल उठाया है कि संबंधित शराब को ‘जहरीला’ घोषित करने से पहले क्या उसका प्रयोगशाला परीक्षण कराया गया था? यदि नमूने की वैज्ञानिक जांच नहीं हुई तो किस आधार पर पूरे ब्रांड की शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया?
मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शराब की गुणवत्ता को लेकर किसी भी निष्कर्ष का आधार वैज्ञानिक परीक्षण होना चाहिए। एक जिले में हुई घटना के आधार पर दूसरे जिले में किसी ब्रांड की पूरी बिक्री रोकना प्रशासनिक सावधानी हो सकती है, लेकिन इसके लिए ठोस प्रमाण और स्पष्ट प्रक्रिया जरूरी है।
अब सहायक आबकारी आयुक्त को 15 दिन में अपना पक्ष रखना होगा। विभागीय जांच में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि आदेश जारी करने से पहले नमूने लिए गए थे या नहीं और यदि लिए गए थे तो उनकी जांच कहां कराई गई।
सवाल सिर्फ यह नहीं कि शराब जहरीली थी या नहीं—सवाल यह भी है कि आबकारी विभाग जैसे जिम्मेदार महकमे में बिना वैज्ञानिक रिपोर्ट के इतना बड़ा फैसला किस आधार पर लिया गया?
अब जवाब नोटिस का नहीं, उस पूरी प्रक्रिया का भी इंतजार है जिसके आधार पर शराब को ‘जहरीला’ बताया गया।

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