पेपर गड़बड़ी, परीक्षा पद्धति और भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी; आयोग की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
मुंबई। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आक्रोश अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। महाराष्ट्र में हजारों अभ्यर्थियों के विरोध के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि मामला सिर्फ एक परीक्षा या भर्ती का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम से टूट चुके भरोसे का है।
छात्रों की नाराजगी के पीछे प्रश्नपत्र से जुड़ी कथित गड़बड़ियां, भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा पद्धति में बदलाव जैसे मुद्दे हैं। हाल में एमपीएससी की परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग करते हुए विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े लोगों ने 18 सूत्रीय मांगें भी रखी हैं, जिनमें प्रश्नपत्र की सुरक्षा, मूल्यांकन में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग शामिल है।
परीक्षा पद्धति में प्रस्तावित बदलाव भी विवाद का हिस्सा हैं। 2027 से राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषय हटाने और लिखित परीक्षा के कुल अंक 1750 से घटाकर 1250 करने का निर्णय लिया गया है। आयोग ने इसे मूल्यांकन को अधिक समान और मानकीकृत बनाने की दिशा में कदम बताया है।
वहीं, एमपीएससी के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन को पारदर्शी और निष्पक्ष बताते हुए विद्यार्थियों की शंकाओं को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पेपर लीक, रुकी भर्तियां और शिक्षा से जुड़े सवालों के बीच छात्रों का भरोसा लगातार कमजोर हुआ है। अब निगाह सरकार और एमपीएससी पर है कि छात्रों की शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराकर परीक्षा व्यवस्था में भरोसा कैसे बहाल किया जाता है।

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