एफसीआरए संशोधन विधेयक की जांच के लिए 31 सदस्यीय समिति गठित, 19 सदस्य एनडीए के; भाजपा सांसद संजय जायसवाल बने अध्यक्ष
नई दिल्ली। विदेशी चंदे से जुड़े नियमों में बदलाव के प्रस्तावित विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक-2026 की अब संसद की संयुक्त समिति जांच करेगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया है। भाजपा सांसद संजय जायसवाल को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य हैं।
समिति में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के 19 सदस्य हैं, जिनमें भाजपा के 14 सांसद शामिल हैं। गठबंधन के घटक दलों में जनता दल (यू), तेलुगु देशम पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। विपक्ष की ओर से कांग्रेस के पांच सांसद हैं, जबकि समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को भी प्रतिनिधित्व मिला है।
विधेयक को लेकर सबसे बड़ा विवाद उस प्रस्तावित व्यवस्था पर है, जिसके तहत किसी संस्था का एफसीआरए पंजीकरण रद्द, निलंबित या नवीनीकृत नहीं होने की स्थिति में विदेशी चंदे से बनाई गई संपत्तियों पर सरकार द्वारा नियुक्त प्राधिकरण को नियंत्रण, प्रबंधन या निपटान की शक्ति मिल सकती है। विपक्ष और कुछ धार्मिक संगठनों ने इस प्रावधान पर गंभीर आपत्ति जताई है। सरकार का कहना है कि बदलाव का उद्देश्य विदेशी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।
समिति को आगामी शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। अब उसकी बैठकों में संबंधित संगठनों और हितधारकों के पक्ष सुने जाएंगे और विधेयक के प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा होगी।
यानी विदेशी चंदे के साथ-साथ उन संस्थाओं की संपत्तियां भी अब संसद की जांच के दायरे में हैं।

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