गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल से हुए विवादित साक्षात्कार मामले में पंजाब सरकार को बड़ा कानूनी झटका लगा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस के तत्कालीन उप पुलिस अधीक्षक गुरशेर सिंह संधू की बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया है। अदालत ने सरकार को उन्हें सेवा में बहाल करने के निर्देश दिए हैं।
संधू को 2 जनवरी 2025 को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया गया था। सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 311(2)(ब) का सहारा लेते हुए नियमित विभागीय जांच के बिना यह कार्रवाई की थी। उन पर गंभीर कर्तव्य-लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप लगाए गए थे तथा आरोप था कि उन्होंने बिश्नोई के साक्षात्कार की व्यवस्था में भूमिका निभाई।
लेकिन हाईकोर्ट ने इस तरीके पर ही सवाल खड़ा कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि कथित रूप से जांच में सहयोग नहीं करना या आरोपपत्र से बचने की कोशिश करना, अपने आप में नियमित विभागीय जांच खत्म करने के लिए पर्याप्त संवैधानिक आधार नहीं बन जाता।
हालांकि संधू को मिली राहत अंतिम क्लीनचिट नहीं है। अदालत ने उनकी बहाली का रास्ता साफ करते हुए सरकार को लंबित विभागीय जांच जारी रखने की स्वतंत्रता दी है। यानी नौकरी वापस मिलेगी, लेकिन आरोपों की जांच का रास्ता बंद नहीं हुआ है।
अब असली सवाल पंजाब सरकार से है—अगर विभागीय जांच जरूरी थी तो बर्खास्तगी में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई?

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