सीबीआई की तीसरी चार्जशीट में 19 नाम; बैंककर्मियों ने अपनी ही शाखाओं में खुलवाए खाते, अब तक 37 आरोपी और 26 गिरफ्तार
नई दिल्ली। हरियाणा सरकार के आठ अलग-अलग विभागों और संगठनों के करीब 504 करोड़ रुपये के कथित गबन के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने बुधवार को तीसरी चार्जशीट दाखिल कर दी। इस बार जांच की आंच सीधे प्रशासनिक तंत्र के शीर्ष स्तर तक पहुंची है। चार्जशीट में हरियाणा कैडर के छह आईएएस अधिकारियों के साथ आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तीन अधिकारियों और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के एक अधिकारी को आरोपी बनाया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार इस मामले में सरकारी धन को कथित तौर पर योजनाबद्ध तरीके से इधर-उधर किया गया। मामले का एक अहम पहलू यह है कि आरोपी बैंककर्मियों ने कथित तौर पर अपने-अपने बैंक की शाखाओं में खाते खुलवाए, जिनके माध्यम से सरकारी धन के लेनदेन का रास्ता तैयार किया गया।
सीबीआई इससे पहले भी इस मामले में दो आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। तीसरी चार्जशीट के बाद कुल 37 आरोपी जांच के दायरे में आ चुके हैं। एजेंसी अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दौरान 54 स्थानों पर तलाशी भी ली गई।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी विभागों की इतनी बड़ी रकम के लेनदेन पर निगरानी रखने वाली व्यवस्था आखिर कहां थी? यदि बैंक स्तर पर खाते खोले गए और करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ, तो संबंधित विभागों के अधिकारियों और वित्तीय निगरानी तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?
छह आईएएस अधिकारियों के नाम चार्जशीट में आने से मामला और गंभीर हो गया है। अब जांच केवल रकम की बरामदगी तक सीमित नहीं, बल्कि यह पता लगाने पर भी टिक गई है कि 504 करोड़ रुपये के इस कथित खेल में निर्णय लेने, धन जारी करने और उसे दूसरी जगह पहुंचाने की पूरी श्रृंखला कितनी गहरी थी।
हालांकि, चार्जशीट में आरोपी बनाया जाना दोष सिद्ध होना नहीं है। अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।

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