भोपाल। मध्य प्रदेश में बिना वैध बीमा के वाहन चलाने वालों पर अब शिकंजा कसने की तैयारी है। राज्य सरकार जल्द ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। इसके तहत बिना वैध बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल या डीजल देने से रोका जा सकता है। शुरुआत ऐसे जिले से होगी, जहां बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या सबसे ज्यादा है।
प्रस्तावित व्यवस्था में पेट्रोल पंपों पर आधुनिक कैमरे लगाए जाएंगे। वाहन की नंबर प्लेट स्कैन कर उसे वाहन पोर्टल और बीमा संबंधी आंकड़ों से जोड़ा जाएगा। यदि वाहन का बीमा वैध नहीं मिला तो पंप संचालक को ईंधन रोकने का संकेत मिल सकता है। पायलट सफल होने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से दूसरे जिलों में लागू करने की तैयारी है।
यह पहल सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा संबंधी सिफारिशों के बाद आगे बढ़ाई जा रही है। अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने भी बीमा की स्थिति को ईंधन आपूर्ति से जोड़ने वाले पायलट की दिशा में कदम उठाने को कहा था। अदालत ने बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान के लिए स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली को बीमा और वाहन आंकड़ों से जोड़ने का सुझाव भी दिया था।
मध्य प्रदेश में भोपाल, इंदौर और उज्जैन को भी शून्य-मृत्यु जिला कार्यक्रम में शामिल किया गया है। राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में हर साल करीब 13 हजार मौतें होने की जानकारी बैठक में दी गई।
अब सवाल यह है कि बीमा जांच की यह व्यवस्था कितनी तेजी और पारदर्शिता से लागू होगी और तकनीकी गड़बड़ी की स्थिति में वाहन मालिकों को क्या राहत मिलेगी? सरकार के सामने सड़क सुरक्षा के साथ व्यवस्था को व्यावहारिक बनाने की भी चुनौती होगी।

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