नई दिल्ली। सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी और सेवा-सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 311(1) की सुरक्षा तभी लागू होती है, जब कर्मचारी को हटाने वाला अधिकारी उस अधिकारी से रैंक में नीचे हो, जिसने कर्मचारी की नियुक्ति की थी। यदि हटाने वाला अधिकारी नियुक्ति करने वाले अधिकारी के समान रैंक का है, तो केवल इस आधार पर हटाने की कार्रवाई Article 311 के विरुद्ध नहीं मानी जाएगी।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह फैसला Union of India & Ors. v. Ramdhani Prasad मामले में दिया। मामला रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स (RPSF) के एक रक्षक की सेवा समाप्ति से जुड़ा था। कर्मचारी को 1979 में ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया था। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद असिस्टेंट कमांडेंट ने उसे नियमित रक्षक के रूप में नियुक्त किया। बाद में 72 दिन की स्वीकृत छुट्टी से अधिक अनुपस्थित रहने पर विभागीय कार्रवाई हुई और एडजुटेंट ने 1983 में उसे सेवा से हटा दिया।
कर्मचारी ने दावा किया कि उसकी नियुक्ति कमांडेंट/चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ने की थी और एडजुटेंट अधीनस्थ अधिकारी था, इसलिए Article 311(1) के तहत हटाने का आदेश वैध नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी उसके पक्ष में फैसला दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड और संबंधित RPF नियमों की समीक्षा के बाद कहा कि वास्तविक नियुक्ति असिस्टेंट कमांडेंट के आदेश से हुई थी और एडजुटेंट उस अधिकारी से रैंक में नीचे नहीं था। इसलिए संवैधानिक रोक लागू नहीं होती। कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए सेवा से हटाने का आदेश बहाल कर दिया।
फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी अधिकारी को नियमों के तहत अनुशासनात्मक या नियुक्ति संबंधी शक्ति सौंप दिए जाने मात्र से उसकी पदगत वरिष्ठता या रैंक नहीं बदल जाती। यानी Article 311 के सवाल में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि किस अधिकारी के पास कौन-सी शक्ति है; अधिकारी की वास्तविक हायरार्किकल रैंक भी निर्णायक है।
केस: Union of India & Ors. v. Ramdhani Prasad
Citation: 2026 LiveLaw (SC) 983

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