ICU की ऑक्सीजन सप्लाई बंद करने के आरोप में तीन डॉक्टरों को राहत नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार




मुंबई। पुणे के एक अस्पताल के ICU में ऑक्सीजन सप्लाई बंद करने के आरोप में फंसे तीन डॉक्टरों को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथमदृष्टया मामला बनता है। हालांकि, अदालत ने यह अंतिम रूप से तय नहीं किया है कि आरोप साबित हुए हैं।


जस्टिस रंजीतसिंह भोसले ने डॉ. रमेश किसानराव सोनावणे, डॉ. भूषण सोनावणे और डॉ. हर्षल सोनावणे की याचिका खारिज की। तीनों एक ही परिवार से हैं और अस्पताल संचालक डॉ. महेंद्र चव्हाण के ससुराल पक्ष से जुड़े बताए गए हैं। मामला Writ Petition No. 2553/2022, Dr Ramesh Kisanrao Sonawane vs State of Maharashtra का है।


अभियोजन के अनुसार, एक गंभीर रूप से बीमार बच्चा अस्पताल के ICU में भर्ती था। आरोप है कि तीनों डॉक्टर अस्पताल पहुंचे, बच्चे के परिजनों से विवाद हुआ और डॉ. चव्हाण को धमकी दी गई। इसी दौरान ICU की ऑक्सीजन सप्लाई कथित रूप से बंद कर दी गई, जिसके बाद बच्चे की हालत बिगड़ गई। अस्पताल के डॉक्टरों ने उपचार कर बच्चे के vital signs सामान्य किए।


आरोपी डॉक्टरों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि वे डॉ. चव्हाण के बच्चों की तबीयत खराब होने के कारण अस्पताल गए थे और FIR व्यक्तिगत विवाद के चलते दर्ज कराई गई। हाईकोर्ट ने कहा कि इन बचावों की जांच ट्रायल के दौरान होगी। चार्जशीट में नर्सों, अस्पताल कर्मचारियों और वॉचमैन समेत कई गवाहों के बयान दर्ज हैं। कोर्ट के मुताबिक उपलब्ध सामग्री के आधार पर इस स्तर पर FIR रद्द करने का आधार नहीं बनता।


अदालत का संदेश साफ है—FIR रद्द करने के स्तर पर आरोपों की अंतिम सत्यता तय नहीं की जा सकती; जब प्रथमदृष्टया पर्याप्त सामग्री मौजूद हो, तो बचाव के पक्ष की जांच ट्रायल में होगी।

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