महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की औषध निरीक्षक भर्ती परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे डिजिटल साक्ष्यों से कई अहम कड़ियां सामने आ रही हैं। मुंबई अपराध शाखा को 270 से ज्यादा पन्नों की व्हाट्सऐप बातचीत मिली है, जिसमें आरोपी ऋतुजा पाटील और गौरव पाटील के बीच परीक्षा के प्रश्नपत्र और पैसों को लेकर बातचीत होने का दावा किया गया है
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जांच से जुड़े मीडिया विवरणों के मुताबिक, बातचीत में 91 सवालों का विशेष उल्लेख सामने आया। कथित तौर पर ऋतुजा ने परीक्षा के बाद बताया कि उसे पहले मिले प्रश्नों में से करीब 78 सवाल परीक्षा में दिखाई दिए और उसने अतिरिक्त सवालों के साथ कुल 91 प्रश्न हल किए। इनमें 77-78 उत्तरों को लेकर वह आश्वस्त होने की बात करती दिखाई देती है।
मामले में पैसों का एंगल भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। पुलिस के अनुसार, कथित तौर पर प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए 5 लाख रुपये की व्यवस्था करने को लेकर बातचीत हुई थी। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में रकम को लेकर अलग दावे सामने आए हैं, इसलिए अंतिम रकम और लेनदेन की पुष्टि जांच के निष्कर्ष के बाद ही मानी जानी चाहिए।
जांच में ऋतुजा के मोबाइल और सिम को कथित रूप से नष्ट करने की कोशिश की बात भी सामने आई है। दूसरी ओर, प्रश्नपत्र लीक मामले में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और आयोग की परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—270 पन्नों की बातचीत में सामने आए संपर्कों और पैसों की कड़ी आखिर एमपीएससी के भीतर किस स्तर तक जाती है? जांच का अगला चरण इसी सवाल का जवाब तय कर सकता है।

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