मध्य प्रदेश में सहकारिता विभाग का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। महज 8,775 रुपये के कर्ज की वसूली के लिए किसान की 10.31 एकड़ जमीन नीलाम कर दी गई। आरोप है कि अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर जमीन को कम कीमत में नीलाम किया और अपने पद का दुरुपयोग किया। अब इस मामले में लोकायुक्त की विशेष अदालत ने सहकारिता विभाग के दो अधिकारियों को तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है।
विशेष लोक अभियोजक हेमलता कुशवाह के अनुसार, 29 अगस्त 2026 को विशेष न्यायालय के न्यायाधीश मनोज कुमार की अदालत ने जिला सहकारी एवं ग्रामीण विकास बैंक के विक्रय अधिकारी विजेंद्र कुमार कौशल और सहकारिता विभाग के उप पंजीयक अशोक मिश्रा को दोषी ठहराया।
अदालत के सामने यह आरोप साबित हुआ कि दोनों अधिकारियों ने निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए किसान की जमीन को कम कीमत पर नीलाम किया और अपने पद का दुरुपयोग किया। किसान की शिकायत के बाद मामले में धोखाधड़ी, षडयंत्र और फर्जी दस्तावेज तैयार करने सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था।
अदालत ने दोनों अधिकारियों को तीन-तीन वर्ष के कारावास के साथ अर्थदंड भी लगाया है।
मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि जिस किसान की 10.31 एकड़ जमीन नीलाम हुई, उसके खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत महज 8,775 रुपये के कर्ज से हुई थी। अब अदालत के फैसले ने सरकारी तंत्र में गरीब और छोटे कर्जदारों के साथ होने वाली कार्रवाई पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
अरबों के कर्ज पर राहत और हजारों के कर्ज पर जमीन—क्या कानून का तराजू सबके लिए बराबर है?

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