राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली में कथित धोखाधड़ी और पैसों की हेराफेरी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को बड़ा अभियान चलाया। ईडी ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिम बंगाल में करीब 14 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई।
अधिकारियों के मुताबिक केंद्रीय एजेंसी ने इस मामले में दर्ज दो पुलिस प्राथमिकी को आधार बनाकर धनशोधन की जांच शुरू की है। ईडी की लखनऊ क्षेत्रीय इकाई ने बुधवार सुबह विभिन्न संदिग्धों से जुड़े परिसरों पर कार्रवाई शुरू की। जांच का केंद्र एनएचएआई के अलग-अलग टोल प्लाजा पर हुई कथित अनियमित टोल वसूली और उससे जुड़े धन के लेनदेन हैं।
इस मामले की जड़ें इससे पहले हुई पुलिस जांच तक जाती हैं। 2025 में उत्तर प्रदेश विशेष कार्यबल की जांच में टोल वसूली में कथित फर्जी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल और रकम को निजी खातों की ओर मोड़ने का मामला सामने आया था। जांच के बाद एनएचएआई ने 14 टोल संग्रह एजेंसियों पर कार्रवाई की थी और अनियमितताओं को लेकर जुर्माना भी लगाया था।
अब ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित टोल धोखाधड़ी से हासिल रकम कहां गई, किन लोगों या कंपनियों तक पहुंची और क्या इस धन को वैध दिखाने के लिए कोई वित्तीय लेनदेन किया गया।
**टोल की हर गाड़ी से वसूली गई रकम का हिसाब सरकारी तंत्र तक पहुंचना चाहिए था। अब सवाल यही है—सड़क पर जनता से वसूला गया पैसा आखिर किसकी जेब में जा रहा था?**
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