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60 साल पुराने बीज कानून की जगह नया कानून, नकली बीज पर कसेगा शिकंजा


केंद्र सरकार Seed Act, 1966 और Seed (Control) Order, 1983 की जगह नया बीज कानून लाने की तैयारी में है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 10 सितंबर को किसान संगठनों के साथ चर्चा के बाद कहा कि मौजूदा कानून करीब छह दशक पुराना है और कृषि क्षेत्र में आए बदलावों को देखते हुए नए कानून की जरूरत है। सरकार विधेयक को संसद में लाने से पहले किसानों और अन्य हितधारकों से और सुझाव लेगी। 


प्रस्तावित Seed Bill, 2025 का सबसे बड़ा लक्ष्य नकली, मिलावटी और घटिया बीजों की बिक्री पर रोक लगाना है। इसके तहत बीज की गुणवत्ता और उसकी पूरी सप्लाई चेन की निगरानी मजबूत करने, कंपनियों का पंजीकरण और बीज की किस्मों का अनिवार्य पंजीकरण करने का प्रस्ताव है। मौजूदा व्यवस्था में कई निजी कंपनियां ‘truthfully labelled’ बीज बेच सकती हैं, जिन पर अनिवार्य प्रमाणन व्यवस्था लागू नहीं होती। 


नए कानून में ट्रेसबिलिटी पर भी जोर रहेगा, ताकि बीज की किस्म, निर्माता और बाजार तक पहुंचने की प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध रहे। सरकार बीजों की कीमतों को विनियमित करने और किसानों को उचित दाम पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रावधान प्रस्तावित कर रही है। 


जुर्माने और सजा को लेकर सोशल मीडिया पर ₹30 लाख तक के जुर्माने और जेल जैसे दावे चल रहे हैं, लेकिन उपलब्ध ताजा सरकारी/विश्वसनीय रिपोर्टों में अंतिम विधेयक के दंड प्रावधानों का पूरा विवरण अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन्हें फिलहाल प्रस्तावित प्रावधान मानना उचित होगा। सरकार को विधेयक संसद में पेश करने से पहले किसानों से करीब 18,000 सुझाव मिल चुके हैं।

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