33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस की तैयारी; 30 सितंबर तक दावा-आपत्ति, 4 नवंबर को आएगी अंतिम सूची
नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर ने चुनावी तस्वीर बदल दी है। मसौदा मतदाता सूची में करीब 47.5 लाख नाम शामिल नहीं हैं। इसके बाद अब मतदाताओं को अपना नाम दोबारा सूची में दर्ज कराने का मौका दिया गया है। एक सितंबर तक 2,18,139 लोगों ने फॉर्म-6 भरकर नाम जोड़ने का दावा पेश किया है। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया 30 सितंबर तक जारी रहेगी।
आंकड़ों के मुताबिक, नाम हटाने अथवा किसी प्रविष्टि पर आपत्ति के लिए भी 51,522 फॉर्म-7 जमा हुए हैं। वहीं पता बदलने के लिए 2,63,801 फॉर्म-8 आवेदन आए हैं। नाम जोड़ने के सबसे ज्यादा दावे पश्चिमी दिल्ली से आए हैं, जहां 29,510 आवेदन दर्ज हुए।
अब सबसे बड़ा सवाल है—47.5 लाख नाम आखिर बाहर क्यों हुए? अधिकारियों के अनुसार इनमें बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है जिन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि जैसी श्रेणियों में रखा गया है। इनमें से 43 लाख से अधिक नाम अनुपस्थित या स्थानांतरित श्रेणी में बताए गए हैं।
मामला यहीं खत्म नहीं होता। करीब 33 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने की संभावना है। इनमें लगभग 19 लाख मामले विवरण में विसंगति और करीब 14 लाख मामले वर्ष 2002 की पुरानी मतदाता सूची से विवरण का मिलान न होने से जुड़े बताए गए हैं।
अंतिम सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होनी है। यानी अभी मसौदा अंतिम फैसला नहीं है—लेकिन **इतने बड़े पैमाने पर नामों का बाहर होना और फिर लाखों लोगों का उन्हें वापस जोड़ने के लिए आवेदन करना चुनावी व्यवस्था के सामने पारदर्शिता और शुद्धता की बड़ी परीक्षा जरूर है।**

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