इंदौर। सरकारी जमीन पर वर्षों से जमे अतिक्रमण के खिलाफ इंदौर में बड़ी कार्रवाई की गई। राजस्व विभाग, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने साउथ तोड़ा और चंद्रभागा क्षेत्र में विद्या गौड़ मंदिर से दौलतगंज की ओर जाने वाले मार्ग के दोनों ओर किए गए अतिक्रमण को हटाया।
कार्रवाई के दौरान करीब 43 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। टीम ने मौके पर बने 45 दुकान-गोदाम और दो मकानों को हटाया। कार्रवाई के दौरान पुलिस बल तैनात रहा और प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए जेसीबी सहित अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया।
इतनी बड़ी सरकारी जमीन पर लंबे समय से निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं तो अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अतिक्रमण हुआ कैसे और इतने वर्षों तक जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
सरकारी जमीन की निगरानी राजस्व और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। यह भी सामने आना चाहिए कि जमीन पर कब्जे की शुरुआत कब हुई, किसके संरक्षण या अनुमति से निर्माण हुआ और संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
अब प्रशासन के सामने अगली चुनौती इस जमीन को दोबारा अतिक्रमण से बचाने की है। यदि निगरानी व्यवस्था मजबूत नहीं हुई तो आज हटाए गए कब्जे कल फिर खड़े हो सकते हैं।
43 करोड़ की जमीन बचाने के लिए आज बुलडोजर चला, लेकिन सवाल यह है—इतनी महंगी सरकारी जमीन को 43 करोड़ का बनने तक सरकारी तंत्र ने बचाया क्यों नहीं?

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