जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले एशियन गेम्स 2026 में कुल 43 खेलों को शामिल किया गया है। उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार भारत 34 खेलों में हिस्सा लेगा। यानी भारत ने ज्यादातर खेलों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, लेकिन कुछ खेलों में भारतीय दल नजर नहीं आएगा।
भारत के लिए यह एशियाड इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कार्यक्रम में एमएमए, सर्फिंग, पेडल और टेक्रॉल जैसे नए खेलों के साथ ई-स्पोर्ट्स को भी जगह मिली है। क्रिकेट भी कार्यक्रम का हिस्सा है।
भारत किन खेलों में मजबूत दावेदार है?
एथलेटिक्स, शूटिंग, हॉकी, बैडमिंटन, कुश्ती, बॉक्सिंग, तीरंदाजी, कबड्डी, टेनिस, भारोत्तोलन और क्रिकेट में भारत से पदकों की उम्मीद सबसे ज्यादा रहेगी। नए खेलों में भी भारतीय खिलाड़ी अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगे। ताजा टीम जानकारी में भारत के एथलेटिक्स दल में 70 से ज्यादा खिलाड़ी और हॉकी में 40 खिलाड़ी शामिल हैं।
फिर सभी 43 खेलों में भारत क्यों नहीं?
हर खेल में टीम भेजना केवल खिलाड़ियों की उपलब्धता का सवाल नहीं है। चयन के लिए क्वालिफिकेशन मानक, विश्व/एशियाई रैंकिंग, भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन, टीम की प्रतिस्पर्धी क्षमता और खेल की राष्ट्रीय तैयारी जैसे पहलू महत्वपूर्ण हैं। खेल मंत्रालय ने एशियाड 2026 के लिए चयन मानदंड पहले ही जारी किए थे।
यानी किसी खेल में भारत का नहीं उतरना हमेशा यह नहीं बताता कि उस खेल में भारत के पास खिलाड़ी ही नहीं हैं। कई बार पदक की वास्तविक संभावना और चयन मानकों को देखते हुए दल सीमित किया जाता है।
इस बार असली मुकाबला पदकों की संख्या से आगे
भारत पिछले कुछ वर्षों में शूटिंग, एथलेटिक्स, बैडमिंटन और कुश्ती जैसे खेलों में लगातार मजबूत हुआ है। दूसरी तरफ एशिया में चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और कई अन्य देशों की खेल व्यवस्था बेहद मजबूत है।
इसलिए 34 खेलों में उतरना बड़ी मौजूदगी जरूर है, लेकिन असली सवाल यह होगा कि भारत इन 34 मोर्चों में कितने पदक निकाल पाता है।
और शायद यही इस एशियाड की सबसे बड़ी कहानी होगी—**भारत कितने खेलों में उतरा नहीं, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि जिन 34 में उतरा, उनमें कितनी बार तिरंगा सबसे ऊपर पहुंचा।**

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