नई दिल्ली। पुराने कपड़ों के निपटान और उन्हें दोबारा उपयोगी बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार ने पहल तेज कर दी है। राजधानी के मेट्रो स्टेशनों पर बनाए गए ‘अर्पण केंद्रों’ में अब तक करीब 41 टन पुराने कपड़े जमा किए जा चुके हैं। सरकार अब इस अभियान का विस्तार करते हुए 10 और स्थानों पर अर्पण केंद्र खोलने की तैयारी कर रही है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अर्पण केंद्र केवल पुराने कपड़े जमा करने की व्यवस्था नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए कपड़ों के उचित निपटान और रीसाइक्लिंग से उपयोगी उत्पाद तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे कचरा कम करने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
सरकार के मुताबिक, लोगों के घरों में अनुपयोगी पड़े कपड़ों को सीधे कूड़े में फेंकने के बजाय अर्पण केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। यहां एकत्र कपड़ों को उनकी स्थिति और उपयोगिता के आधार पर अलग किया जाता है। इस्तेमाल योग्य कपड़ों को जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा सकता है, जबकि खराब या अनुपयोगी कपड़ों को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा।
41 टन कपड़ों का जमा होना बताता है कि दिल्लीवासियों ने इस पहल को लेकर रुचि दिखाई है। अब 10 नए केंद्र खुलने के बाद इस अभियान का दायरा और बढ़ने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य पुराने कपड़ों को कचरा बनने से रोककर उन्हें दोबारा उपयोग की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाना है।

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