उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व धीरे-धीरे कम हो सकता है। खासकर 35 वर्ष के बाद कैल्शियम, विटामिन D, पर्याप्त प्रोटीन और नियमित शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। घुटनों से आवाज आना हमेशा हड्डियों की कमजोरी का संकेत नहीं होता, लेकिन लगातार दर्द, सूजन या चलने में परेशानी हो तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
कैल्शियम और विटामिन D जरूरी: दूध-दही, पनीर, रागी, तिल और कैल्शियम युक्त अन्य खाद्य पदार्थ आहार में शामिल करें। विटामिन D शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में मदद करता है। इसकी कमी होने पर डॉक्टर की सलाह से जांच और सप्लीमेंट लिए जा सकते हैं।
व्यायाम को दिनचर्या बनाएं: तेज चाल से चलना, सीढ़ियां चढ़ना और शरीर के अनुरूप strength training हड्डियों और मांसपेशियों को सहारा देती है। लंबे समय तक बैठे रहने की आदत कम करें।
प्रोटीन पर भी ध्यान दें: मांसपेशियां मजबूत रहेंगी तो शरीर का भार हड्डियों और जोड़ों पर बेहतर तरीके से पड़ेगा। दाल, दूध, दही, अंडे, सोया और अन्य प्रोटीन स्रोत उपयोगी हो सकते हैं।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें: दोनों का लंबे समय तक अधिक सेवन हड्डियों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
अगर कमर या हड्डियों में लगातार दर्द, बार-बार फ्रैक्चर, ऊंचाई कम होना या मामूली चोट में हड्डी टूटने जैसी समस्या हो तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

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