छह विभागों की योजनाओं पर फंडिंग संकट, 31 दिसंबर तक तय करनी होगी सरकार को दिशा

 


 प्रणव बजाज


मध्यप्रदेश में किसान, ग्रामीण परिवार, मरीज, महिलाएं, बच्चे और शहरों की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी योजनाएं अब वित्तीय समीक्षा के दौर में हैं। किसान कल्याण एवं कृषि विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, नगरीय विकास एवं आवास, महिला एवं बाल विकास तथा लोक निर्माण विभाग की कई योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए वित्त विभाग की सहमति और इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी जरूरी है।



विभागों के लिए पहले 30 सितंबर 2026 तक प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा रखी गई थी, लेकिन कई विभाग तय अवधि में प्रस्ताव तैयार नहीं कर सके। अब 31 दिसंबर 2026 तक का अतिरिक्त समय दिया गया है। इसके बाद आगामी बजट और अगले वर्षों की वित्तीय योजना में इन योजनाओं के लिए प्रावधान प्रभावित होने की आशंका है।


समीक्षा में केवल खर्च का हिसाब नहीं, बल्कि योजना से हुए आउटपुट और आउटकम को भी देखा जाएगा। यानी कितना पैसा खर्च हुआ और उसके बदले जनता को वास्तविक लाभ कितना मिला।


कृषि विभाग में मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना और फसल विस्तार कार्यक्रम, जबकि पंचायत विभाग में ग्रामीण आवास की राज्य पूरक योजनाएं, ग्रामीण आजीविका मिशन और मनरेगा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग की मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के वित्तपोषित कार्यक्रम और जिला अस्पतालों के उन्नयन की योजनाएं भी समीक्षा के दायरे में हैं।


नगरीय विकास में शहरी बुनियादी ढांचा, अमृत मिशन और शहरी आजीविका मिशन, महिला एवं बाल विकास में पोषण आहार और आईसीडीएस की अनुपूरक योजनाएं तथा पीडब्ल्यूडी में राज्य सड़क विकास, सेतु निर्माण और भवन रखरखाव से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।


अब विभागों के सामने तीन महीने में अपनी योजनाओं की उपयोगिता, उपलब्धियां और वित्तीय जरूरत साबित करने की चुनौती है। सवाल सिर्फ बजट का नहीं है—सवाल यह भी है कि जिन योजनाओं पर वर्षों से सरकारी पैसा खर्च हो रहा है, उनका वास्तविक लाभ जनता तक कितना पहुंचा।

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