मणिपुर में शांति की उम्मीद एक बार फिर हिंसा की आग में धुआं हो गई। कांगपोकपी जिले में मंगलवार तड़के हथियारबंद लोगों ने तीन लियांगमई नागा गांवों को निशाना बनाया। पुलिस के मुताबिक तापन खुल्लेन, तापन खुनौ और मकुई पीपुराम में करीब चार बजे हमला शुरू हुआ। कम से कम 30 घरों के साथ वाहन और दूसरी संपत्तियां आग की भेंट चढ़ गईं, जबकि एक ग्रामीण के घायल होने की खबर है
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यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले इसी जिले में तीन कुकी नागरिकों की अलग-अलग गोलीबारी में मौत हुई थी। लगातार हो रही जवाबी हिंसा ने इम्फाल-तामेंगलोंग मार्ग के आसपास बसे गांवों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि गांवों तक हथियारबंद हमलावर पहुंचते हैं, गोलियां चलती हैं और घर जला दिए जाते हैं। इसके बावजूद सुरक्षा बलों की मौजूदगी हिंसा रोकने में कितनी प्रभावी है, यह सवाल अब स्थानीय लोगों के बीच खुलकर उठ रहा है। पुलिस और केंद्रीय बलों ने इलाके में अतिरिक्त तैनाती कर तलाशी अभियान शुरू किया है।
हमले की जिम्मेदारी अभी किसी संगठन ने आधिकारिक रूप से नहीं ली है। यही वजह है कि आरोपों और दावों के बीच जांच निष्पक्ष तरीके से होना जरूरी है। मणिपुर में अब सिर्फ सुरक्षा बल बढ़ाना पर्याप्त नहीं—हमलावरों की पहचान, हथियारों की पहुंच और खुफिया तंत्र की नाकामी, तीनों का जवाब चाहिए।

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