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20 साल बाद MP की सड़कों पर लौटेगी सरकारी बसों की रफ्तार, 6 महीने में 520 बसें; AI तय करेगा रूट

 


इंदौर। मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को करीब दो दशक बाद नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी है। सरकार के प्रस्तावित मॉडल के तहत अगले छह महीनों में प्रदेश की सड़कों पर 520 नई बसें उतारने की योजना है। इनमें 486 पीएम ई-बस और 34 इंटरसिटी बसें शामिल हैं। लक्ष्य सिर्फ बसों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे परिवहन सिस्टम को तकनीक आधारित बनाना है।



योजना के मुताबिक 2027 तक ई-बसों की संख्या 1100 करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए आधुनिक डिपो, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में AI आधारित रूट प्लानिंग, डिजिटल टिकटिंग और ITMS के जरिए बसों की निगरानी तथा संचालन को अधिक व्यवस्थित करने की बात कही गई है।


केंद्र की पीएम-ईबस योजना के तहत मध्य प्रदेश के लिए 972 बसें आवंटित हैं। इनमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, सागर, ग्वालियर, सतना, देवास और उज्जैन जैसे शहर शामिल हैं।


सरकार का दावा है कि आधुनिक बस नेटवर्क से शहरों के साथ छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी। लेकिन असली परीक्षा कागज पर नहीं, सड़कों पर होगी। सवाल यह है कि नई बसों के साथ समयबद्ध संचालन, पर्याप्त ड्राइवर-स्टाफ, चार्जिंग व्यवस्था, किराए की पारदर्शिता और नियमित मेंटेनेंस कितना मजबूत किया जाता है। तकनीक तभी बदलाव मानेगी, जब यात्री को बस समय पर मिले और सफर भरोसेमंद बने।

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