नई दिल्ली। अनिल अंबानी समूह की कंपनियों पर चल रही वित्तीय जांच के बीच रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड भी प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के दायरे में आ गई है। करीब 179.66 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कंपनी को प्रस्तावित आरोपी के तौर पर नामित किया गया है। कंपनी ने 2 सितंबर को शेयर बाजारों को दी सूचना में इसकी पुष्टि की है।
मामला अब नई दिल्ली की विशेष पीएमएलए अदालत तक पहुंच चुका है। कंपनी के मुताबिक उसे प्रवर्तन निदेशालय की अभियोजन शिकायत और उससे संबंधित दस्तावेज प्राप्त हुए हैं। अदालत में फिलहाल संज्ञान लेने से पहले की सुनवाई होनी है। यानी इस स्तर पर अदालत ने आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।
कंपनी ने शेयर बाजार को बताया कि इस कार्रवाई का संभावित वित्तीय प्रभाव फिलहाल निर्धारित नहीं किया जा सकता। रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने यह भी कहा है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए कानूनी सलाह के अनुसार आवश्यक कदम उठाएगी।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अनिल अंबानी समूह की दूसरी कंपनियां भी अलग-अलग वित्तीय मामलों में जांच एजेंसियों के निशाने पर रही हैं। अप्रैल 2026 में ईडी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में 3,034.90 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क करने की कार्रवाई की थी।
अब 179 करोड़ रुपये से अधिक के इस मामले में रिलायंस इन्फ्रा का नाम सामने आने से समूह पर चल रही जांच और गहरा गई है। हालांकि सिर्फ नोटिस या प्रस्तावित आरोपी बनाए जाने को दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता। अंतिम स्थिति अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।

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