भारत में सोने की खरीद का रुख तेजी से बदलता दिख रहा है। सोने की कुल मांग और आयात पर ऊंची कीमतों का दबाव होने के बावजूद संयुक्त अरब अमीरात से आने वाले सोने की हिस्सेदारी में जबरदस्त उछाल आया है। जून 2026 में भारत ने यूएई से करीब 64.94 करोड़ डॉलर का सोना आयात किया, जो जून 2025 के 23.59 करोड़ डॉलर के मुकाबले 175.2 प्रतिशत अधिक है।
दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान दुनिया के बाकी देशों से भारत का सोना आयात 17.7 प्रतिशत घटकर 132 करोड़ डॉलर रह गया। यानी जून में भारत के सोने के आयात में हुई पूरी बढ़ोतरी अकेले यूएई से आने वाली खेपों के कारण हुई। भारत के कुल मासिक सोना आयात में यूएई की हिस्सेदारी एक साल में 12.8 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गई।
अप्रैल-जून की तिमाही में भी तस्वीर चौंकाने वाली रही। यूएई से सोने का आयात 124.8 प्रतिशत बढ़कर 314 करोड़ डॉलर पहुंच गया। इस तिमाही में भारत के कुल सोना आयात में हुई 353 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी में अकेले यूएई का योगदान करीब 174 करोड़ डॉलर रहा।
इसके पीछे भारत-यूएई व्यापार समझौते के तहत मिलने वाली एक प्रतिशत शुल्क रियायत भी जांच के घेरे में है। वैश्विक व्यापार अनुसंधान पहल ने आशंका जताई है कि इससे सोने की आपूर्ति को यूएई के रास्ते मोड़ने का प्रोत्साहन मिल सकता है।
हालांकि इसे केवल ‘दुबई का गोल्ड रश’ कहना पूरी तस्वीर नहीं है। विश्व स्वर्ण परिषद के मुताबिक 2026 की दूसरी तिमाही में भारत की सोने की मांग मात्रा के लिहाज से 6 प्रतिशत घटी, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण खर्च रिकॉर्ड स्तर पर रहा।

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