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बंगाल में 13 विवाह कानूनों की जगह एक कानून! हिंदू-मुस्लिम विवाह से तलाक तक बदलेंगे नियम, दिल्ली में पहली बैठक

 

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है। प्रस्तावित कानून के तहत अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लिए लागू कम से कम 13 मौजूदा विवाह संबंधी कानूनों को हटाकर एक समान कानूनी व्यवस्था बनाने की तैयारी है। इसका दायरा विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और संरक्षकता जैसे मामलों तक बताया गया है। 



प्रस्तावित व्यवस्था में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, पारसी और अन्य समुदायों के विवाह के लिए समान नियम लागू करने की बात सामने आई है। इनमें हिंदू विवाह अधिनियम, मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े कानून, विशेष विवाह अधिनियम, ईसाई विवाह कानून और पारसी विवाह एवं तलाक कानून समेत 13 अधिनियम शामिल बताए गए हैं। हालांकि धार्मिक रीति-रिवाज और पारंपरिक पहनावे में हस्तक्षेप नहीं करने की बात कही गई है। 


प्रस्ताव के मुताबिक हर विवाह का पंजीकरण अनिवार्य होगा। अदालत के बाहर होने वाले तलाक को कानूनी मान्यता नहीं देने, पति-पत्नी को भरण-पोषण में समान अधिकार देने और बहुविवाह पर रोक जैसे प्रावधान भी प्रस्तावित हैं। लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और उससे पैदा होने वाले बच्चों के कानूनी अधिकारों को लेकर भी व्यवस्था बनाने की बात है। 


उत्तराधिकार में बेटियों और बेटों को बराबर अधिकार देने तथा गोद लेने और वसीयत से जुड़े नियमों को धर्मनिरपेक्ष बनाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है।


इसी दिशा में 3 सितंबर को दिल्ली में समिति की पहली बैठक हो रही है, जिसमें बंगाल में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता का आगे का खाका तैयार किया जाएगा। हालांकि इसे अंतिम कानून मानना अभी जल्दबाजी होगी; प्रस्ताव को आगे की प्रक्रिया और विधायी मंजूरी से गुजरना होगा।

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