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पितृ पक्ष: नौकरी की व्यस्तता के कारण 15 दिन तर्पण न कर पाएं तो किस दिन करें श्राद्ध? जानें शास्त्रों के नियम

 

इंदौर। पितृ पक्ष में हर दिन तर्पण या श्राद्ध करना हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं माना जाता। नौकरी या अन्य व्यस्तताओं के कारण यदि पूरे 15 दिनों तक तर्पण नहीं कर पा रहे हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण बात पितर की मृत्यु तिथि को जानना है। धार्मिक परंपरा में जिस तिथि को पूर्वज का निधन हुआ था, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर उनका श्राद्ध करना प्रमुख माना जाता है।



मृत्यु तिथि मालूम है तो उसी दिन श्राद्ध करें। उदाहरण के लिए, यदि किसी पूर्वज का निधन कृष्ण पक्ष की सप्तमी को हुआ था, तो पितृ पक्ष की सप्तमी तिथि को उनके निमित्त श्राद्ध किया जाता है। इसलिए नौकरी करने वाले व्यक्ति को रोज तर्पण न कर पाने की चिंता करने के बजाय अपनी निर्धारित श्राद्ध तिथि पर विधिपूर्वक कर्म करना चाहिए।


मृत्यु तिथि मालूम नहीं है या उस दिन श्राद्ध नहीं कर पाए तो? ऐसी स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या महत्वपूर्ण मानी जाती है। 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को होगी। इस दिन ज्ञात-अज्ञात पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है।


शास्त्रीय परंपराओं में अमावस्या को उन पूर्वजों के लिए भी श्राद्ध का अवसर माना गया है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो सका। हालांकि विधि, मुहूर्त और तिथि की गणना क्षेत्रीय पंचांग तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।


इसलिए 15 दिन रोज तर्पण न कर पाने पर घबराने की जरूरत नहीं है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार निर्धारित तिथि पर श्राद्ध करें; तिथि ज्ञात न हो या विशेष तिथि पर कर्म संभव न हो तो सर्वपितृ अमावस्या का विकल्प माना जाता है।

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