मध्यप्रदेश में 3 प्रांतों की जगह संभागीय ढांचे की तैयारी, इंदौर की बैठक में तय होगी नई व्यवस्था
प्रणव बजाज
इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के बाद संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी ने मध्यप्रदेश को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मौजूदा व्यवस्था में प्रदेश संघ की दृष्टि से मालवा, मध्य भारत और महाकौशल तीन प्रांतों में बंटा है। अब प्रांत आधारित संचालन को बदलकर संभागीय व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव पर मंथन चल रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक नई व्यवस्था में 11 संभाग बनाए जाने की बात सामने आई है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर संघ की क्षेत्रीय जिम्मेदारियों और रिपोर्टिंग सिस्टम पर पड़ सकता है। प्रस्तावित मॉडल में प्रांत प्रचारक की मौजूदा भूमिका के स्थान पर संभाग प्रचारक स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारियां बढ़ाने की चर्चा है। हर संभाग को अपेक्षाकृत स्वतंत्र संगठनात्मक इकाई के रूप में संचालित करने की योजना बताई जा रही है।
मालवा प्रांत के पुनर्गठन का उदाहरण पहले ही सामने आ चुका है। रिपोर्टों के अनुसार इसे आगे इंदौर और उज्जैन संभाग में बांटने का प्रस्ताव है। मालवा प्रांत की वर्तमान संरचना में हजारों शाखाएं और सैकड़ों स्थान शामिल हैं, इसलिए इसका विभाजन केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं बल्कि जमीनी संगठन संचालन में बदलाव होगा।
संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की प्रस्तावित इंदौर बैठक में शताब्दी वर्ष के दौरान हुए कामकाज की समीक्षा के साथ संगठनात्मक संरचना पर भी चर्चा होनी है। रिपोर्ट के अनुसार बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित विभिन्न प्रांतों के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे।
संघ के आधिकारिक दस्तावेजों में भी प्रांत के साथ विभाग और जिला स्तर तक संगठनात्मक कामकाज और जिम्मेदारियों का उल्लेख मिलता है। ऐसे में संभागीय ढांचे की ओर संभावित बदलाव का मतलब जमीनी स्तर तक जिम्मेदारियों के पुनर्विन्यास से भी है।
अब असली सवाल यही है—100 वर्ष पूरे करने के बाद संघ अपने अगले 100 वर्ष के संगठन को किस ढांचे में आगे बढ़ाएगा? इंदौर की बैठक में होने वाली चर्चा इस सवाल का महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।

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