नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर दुनिया की अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। सितंबर में Brent और WTI दोनों प्रमुख बेंचमार्क 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुके हैं। 11 सितंबर को Brent क्रूड 104.61 डॉलर और WTI 100.05 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। हालांकि 21 सितंबर को कीमतों में कुछ नरमी आई और Brent करीब 101.71 डॉलर तथा WTI 98.15 डॉलर तक फिसल गया।
इसके बावजूद तेल बाजार में जोखिम खत्म नहीं हुआ है। मध्य पूर्व में जारी तनाव, जहाजों पर हमलों और सऊदी अरब की तेल आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं ने बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ाई है। Reuters के मुताबिक सितंबर के दौरान सऊदी अरब ने Hormuz के रास्ते अपने निर्यात में बढ़ोतरी की है, जिससे कुछ आपूर्ति दबाव कम हुआ है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव अब भी कीमतों के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है।
तेल महंगा होने का सीधा असर परिवहन और ईंधन लागत पर पड़ सकता है। इसके बाद माल ढुलाई, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
फिलहाल बाजार की नजर मध्य पूर्व की स्थिति और तेल आपूर्ति की बहाली पर है। अगर सप्लाई में फिर बड़ी बाधा आती है तो कीमतों में दोबारा तेज उछाल संभव है, जबकि तनाव कम होने पर कीमतों पर दबाव बन सकता है।

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